स्वदेशी और राष्ट्र सेवा

लेखक

  • भगवत सिंग पटैल Author

सार

स्वदेशी हमारे स्वतंत्रता संघर्ष की वह सोच है जिसने लोगों को अपने देश, अपनी मिट्टी और अपने श्रम से जुड़ने की प्रेरणा दी। यह केवल विदेशी वस्तुओं के विरोध का आंदोलन नहीं था, अपितु देश की अर्थव्यवस्था, समाज और आत्मसम्मान को मजबूती देने का एक बड़ा प्रयास भी था। यह शोध पत्र स्वदेशी आंदोलन के इतिहास, उसके प्रभाव, गांधी की सोच में उसकी जगह और आज के भारत में उसकी उपयोगिता को सरल शब्दों में समझाने का प्रयास करता है। अध्ययन विश्वसनीय पुस्तकों, शोध लेखों और उपलब्ध प्रतिवेदनों पर आधारित है। इसका उद्देश्य यह बताना है कि स्वदेशी कैसे राष्ट्र सेवा का मजबूत साधन बना और आज भी क्यों जरूरी है।

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  • भगवत सिंग पटैल

    वाणिज्य विभाग, शासकीय नेहरु स्नातकोत्तर महाविद्यालय, देवरी, सागर (म.प्र.)

प्रकाशित

2026-02-16

अंक

खंड

Articles

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