A स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारतर: विविध संदर्भ
सार
मानव सभ्यता के इतिहास में अगर देखें तो ऐसे अनेक विचार रहे हैं जिन्होंने किसी राष्ट्र की दिशा और उसकी प्रगति की गति को निर्धारित किया। भारतीय समाज के लिए स्वदेशी ऐसा ही एक महत्त्वपूर्ण सिद्धांत रहा है, जिसने न केवल आर्थिक संरचना को प्रभावित किया, यद्धपि सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक मूल्य और राष्ट्रीय आत्मा को भी बल प्रदान किया है। स्वदेशी का भाव ही हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है एवं स्थानीयता के प्रति सम्मान जगाता है और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाला मार्ग प्रशस्त करता है।
वर्तमान वैश्वीकृत विश्व में जहाँ उत्पादन और बाजार की सीमाएँ निरंतर धुंधली हो रही हैं वहीं दुसरी ओर स्वदेशी का महत्व और भी बढ़ गया है। आज यह केवल आर्थिक नीति नहीं, बल्कि राष्ट निर्माण की चेतना बन चुका है।
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प्रकाशित
2026-01-01
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A स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारतर: विविध संदर्भ. (2026). World View Research Bulletin An International Multidisciplinary Research Journal, 1(3). https://wrb.education/index.php/wrb/article/view/40
