वरिष्ठ नागरिकों के जीवन-गुणवत्ता सुधार में हास्य योग की प्रभावशीलताः एक अध्ययन

लेखक

  • Rupesh (Research Scholar), Dr. Rachna Jain (HOD), Professor (Dr.) Usha Khandelwal (Dean, Faculty of Yoga Science and Naturopathy), Eklavya University, Damoh (M.P.) Author

सार

वर्तमान युग तीव्र सामाजिक, आर्थिक एवं प्रौद्योगिकीय परिवर्तनों का युग है। इन परिवर्तनों ने जहाँ मानव जीवन को अनेक सुविधाएँ प्रदान की हैं, वहीं दूसरी ओर तनाव, अकेलापन, मानसिक असंतुलन तथा सामाजिक पृथक्करण जैसी समस्याओं को भी जन्म दिया है। इन समस्याओं का सर्वाधिक प्रभाव समाज के वरिष्ठ नागरिकों पर दृष्टिगोचर होता है। आयु में वृद्धि के साथ-साथ शारीरिक क्षमता का क्षीण होना, दीर्घकालिक रोगों का प्रादुर्भाव, सामाजिक भूमिकाओं में परिवर्तन, पारिवारिक संरचना का विघटन तथा भावनात्मक उपेक्षा जैसे अनेक कारक उनके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। फलतः वृद्धावस्था केवल जैविक परिवर्तन का चरण न होकर सामाजिक, मनोवैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक चुनौतियों से युक्त जीवनावस्था बन जाती है। ऐसी परिस्थिति में स्वास्थ्य संरक्षण की उन विधियों का महत्व बढ़ जाता है जो सरल, सुरक्षित, कम व्यय वाली तथा व्यापक जनसमुदाय के लिए सहज उपलब्ध हों। हास्य योग ऐसी ही एक समग्र पद्धति है, जिसमें बिना किसी बाह्य कारण के सामूहिक रूप से हँसने के अभ्यास को योगिक श्वसन, विश्राम एवं सकारात्मक मानसिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ा जाता है। नियमित अभ्यास से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा में वृद्धि होती है, तनावकारक हार्मोनों का स्तर घटता है, मनोदशा में सकारात्मक परिवर्तन आता है तथा सामाजिक सहभागिता सुदृढ़ होती है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य यह परीक्षण करना है कि हास्य योग वरिष्ठ नागरिकों की जीवन-गुणवत्ता के विभिन्न आयामोंकृजैसे शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, सामाजिक संबंध, भावनात्मक प्रसन्नता तथा आत्मसंतोषकृपर किस सीमा तक प्रभाव डालता है। अध्ययन के लिए प्रायोगिक शोध-अभिकल्प का उपयोग किया गया है, जिसमें पूर्व-परीक्षण एवं पश्चात्-परीक्षण के माध्यम से प्राप्त आँकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण किया जाएगा। अध्ययन से यह अपेक्षा की जाती है कि नियमित हास्य योग का अभ्यास वरिष्ठ नागरिकों के मानसिक तनाव, अकेलेपन, निराशा तथा सामाजिक अलगाव को कम करते हुए उनके समग्र जीवन-स्तर में सकारात्मक सुधार लाएगा। यह शोध वृद्धजन स्वास्थ्य संवर्धन की दिशा में एक व्यवहारिक एवं वैज्ञानिक आधार प्रस्तुत करेगा तथा नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, योग प्रशिक्षकों तथा सामाजिक संगठनों के लिए उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

 

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  • Rupesh (Research Scholar), Dr. Rachna Jain (HOD), Professor (Dr.) Usha Khandelwal (Dean, Faculty of Yoga Science and Naturopathy), Eklavya University, Damoh (M.P.)

    Faculty of Yoga Science and Naturopathy, Eklavya University, Damoh (M.P.)

प्रकाशित

2026-07-15

अंक

खंड

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